Sunday, October 5, 2008
बैलेट का विकल्प नहीं बुलेट-माओवादी
Saturday, October 4, 2008
छवि खराब की -जज ने कहा
Friday, October 3, 2008
टाटा के जाने से टूट गए सपने
Thursday, October 2, 2008
रायपुर से कांग्रेस का 'सेनापति' पत्रकार?
Wednesday, October 1, 2008
योग गुरु बाबा रामदेव का खेल
नई दिल्ली, अक्टूबर - रामायण में चर्चित हुई संजीवनी बूटी की फिर से तलाश कर लेने का स्वामी रामदेव का दावा खतरे में है। रामदेव और उनकी पतंजलि योग पीठ तो संजीवनी बूटी के पेटेंट की भी तैयारी कर चुकी थी। यह वही बूटी है जिसके बारे में रामायण में कहा गया है कि युद्व में बेहोश पड़े लक्ष्मण को जीवित करने के लिए हनुमान पूरा पहाड़ ही उठा लाए थे।
पतंजलि पीठ के आचार्य बाल कृष्ण ने मीडिया से कहा था कि हमने संजीवनी बूटी खोज ली है और अब संसार की किसी भी बीमारी का इलाज असंभव नहीं रह गया। लेकिन वैज्ञानिक और खास तौर पर वनस्पति वैज्ञानिक इस दावे को बेहूदा बता रहे है और कह रहे है कि यह स्वामी रामदेव का प्रचार का एक और टोटका है। जिन प्रोफेसर आरडी गौर को स्वामी रामदेव खुद बहुत बड़ा विद्वान मानते हैं और जो अभी हाल तक हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविधालय के वनस्पति विभाग के प्रमुख थे, खुद इस दावे के खिलाफ खड़े हो गए। श्री गौर ने कहा है कि जो बूटी कही जा रही है वह असल में वनस्पति विज्ञान की भाषा में सैलिनम कैडोलिल और गॉसीफिफोरा नाम के वे पौधे हैं जो हिमालय में सदियों से पाए जाते हैं और इनके औषधिय गुणों की जानकारी इलाके के बच्चे बच्चे को है। उन्होंने यह भी कहा कि रामायण के अनुसार संजीवनी बूटी में वे रसायन है जिनकी वजह से वह रात को जगमगाती है, इसमें बेहोशी दूर करने के गुण है और यह स्नायु तंत्र को ताकतवर बनाती है। श्री गौर के अनुसार जो पौधे संजीवनी बूटी बताए जा रहे हैं उनमें इनका एक भी गुण नहीं है।
इतना ही नहीं हिमालय की औषधीय वनस्पतियों और अन्य पौधों के विशेषज्ञ और पदम श्री प्राप्त प्रोफेसर ए एन पूरोहित ने भी रामदेव की मंडली की इस दावे को बड़बोलपन और जनता को मुनाफे के लिए बेवकूफ बनाने की कोशिश बताया है। इस झगड़े में उत्तराखंड सरकार भी फंस गई है क्योंकि तीन महीने पहले स्वास्थ्य मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संजीवनी बूटी खोजने के लिए एक सरकारी अभियान शुरू किया था लेकिन पतंजलि पीठ के दावे से इस अभियान पर भी सवालिया निशान लग गया है। श्री निशंक ने आज कहा कि सरकार संजीवनी बूटी खोजने का अपना कल्याणकारी कार्यक्रम जारी रखेगी। डेटलाइन इंडिया
Saturday, September 20, 2008
राजनीति में सफारी की सवारी, कितनी भारी
Monday, March 10, 2008
गांधी ने तो देश को तोड़ने का काम किया-योगी
योगी आदित्य नाथ ने सम्मेलन में आगे कहा-देश को राजनैतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का काम भगवान श्रीराम और कृष्ण ने किया। और यही दोनों राष्ट्रपिता का सम्मान पाने के हकदार हैं। जिन्हें राष्ट्रपिता का दज्र दिया गया है, देश की आजदी में भी उनका कोई खास योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की आजदी में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अगर सुभाष चंद्र बोस की आजद हिन्द फौज न होती और वीर सावरकर जसे क्रांतिकारियों ने अपनी जवानी न बरबाद की होती तो देश को आजदी नहीं मिल पाती।
योगी का ये सम्मेलन राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर था। इसका आयोजन योगी की हिन्दू युवा वाहिनी ने सरस्वती शिशु मंदिर के उस प्रांगण में कराया था जहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
और भाजपा के राजनैतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। हिन्दू युवा वाहिनी के मंच पर योगी आदित्य नाथ का राजधानी में यह पहला कार्यक्रम था। योगी आदित्य नाथ पूर्वाचल के कई जिलों मसलन गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, गोण्डा, बलरामपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर जसे कई जिलों में अपना आधार बढ़ाया है। पिछले विधानसभा चुनाव में इन इलाकों में टिकट बंटवारे को लेकर उनका भाजपा से तीखा विवाद भी हो गया था। इस लिहाज से योगी आदित्य नाथ की लखनऊ में उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी ज रही है। आज के सम्मेलन में जहां लखनऊ विश्वविद्यालय के काफी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए थे, वहीं योगी समर्थक विधायक भी मौजूद थे। आज के सम्मेलन में पत्रकार योगेश मिश्र विशिष्ट अतिथि थे और सम्मेलन की अध्यक्षता लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा ने की। बहरहाल महात्मा गांधी पर योगी आदित्य नाथ की टिप्पणी से मंच पर बैठे लोग भी हैरान रह गये।